पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में ऑर्डर फ्लो किसी भी कंपनी के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर होता है। सोमवार को Diamond Power Infrastructure Limited के शेयरों में आई तेजी इसी बात का संकेत है कि बाजार इंफ्रा से जुड़े नए ऑर्डर्स को कितनी अहमियत दे रहा है।

शेयर प्राइस में क्या हुआ?
सोमवार के ट्रेडिंग सेशन में Diamond Power Infrastructure Limited के शेयर करीब 3.9% चढ़कर ₹141.80 पर पहुंच गए। पिछला क्लोजिंग प्राइस ₹136.45 था। स्टॉक का 52-वीक हाई ₹185.10 और 52-वीक लो ₹81 है, यानी हाल के महीनों में इसमें तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
क्या है ताजा खबर?
Vadodara आधारित Diamond Power Infrastructure Limited को देश की बड़ी इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन कंपनी Larsen & Toubro Limited से एक अहम घरेलू ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर L&T की कंस्ट्रक्शन डिवीजन से मिला है और इसमें पावर केबल्स की सप्लाई शामिल है।
ऑर्डर की कुल वैल्यू करीब ₹72.51 करोड़ (टैक्स को छोड़कर) है। कंपनी के अनुसार, यह कॉन्ट्रैक्ट “किलोमीटर रेट बेसिस” पर दिया गया है, जिसमें प्राइPower infrastructure company receives order worth Rs 72,51,24,746 from Larsen & Toubro Ltd, Constructionस वैरिएशन (PV) फॉर्मूला भी शामिल है। आसान शब्दों में कहें तो कच्चे माल की कीमतों में बदलाव का असर कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू पर एडजस्ट किया जा सकेगा।
प्रोजेक्ट टाइमलाइन और ऑर्डर बुक पर असर
इस ऑर्डर का एक्जीक्यूशन पीरियड 6 जनवरी 2026 से 30 सितंबर 2026 तक तय किया गया है। यानी आने वाले करीब 9 महीनों तक कंपनी को इस प्रोजेक्ट से रेगुलर रेवेन्यू विज़िबिलिटी मिलेगी।
यह ऑर्डर Diamond Power की मौजूदा ऑर्डर बुक में सीधा इजाफा करता है, जो किसी भी EPC और केबल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के लिए बिजनेस स्टेबिलिटी का अहम संकेत होता है।
यह खबर क्यों मायने रखती है?
भारत में पावर ट्रांसमिशन, रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में
• बड़ी EPC कंपनियों से मिले ऑर्डर्स
• तय टाइमलाइन के साथ एग्जीक्यूशन
• प्राइस वैरिएशन जैसी सुरक्षा
ये सभी फैक्टर्स किसी मिड-साइज़ पावर इक्विपमेंट कंपनी के लिए रिस्क को कम करते हैं।
कंपनी के बिजनेस की झलक
Diamond Power Infrastructure Limited पहले “DIACABS” ब्रांड के तहत पावर सेक्टर के लिए
• कंडक्टर्स
• पावर केबल्स
• ट्रांसमिशन टावर्स
का निर्माण करती थी, साथ ही EPC सर्विसेज भी देती थी। कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट गुजरात के वडोदरा में है और इसका डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ है।
ऑपरेशनल संकेत क्या बताते हैं?
कंपनी ने हाल के समय में अपने वर्किंग कैपिटल साइकिल को काफी सुधारा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्किंग कैपिटल डेज़ पहले जहां 34.5 दिन थे, अब घटकर करीब 10 दिन रह गए हैं। यह संकेत देता है कि कैश फ्लो मैनेजमेंट पहले से बेहतर हुआ है।
निष्कर्ष
L&T से मिला यह नया ऑर्डर Diamond Power Infrastructure के लिए न सिर्फ रेवेन्यू विज़िबिलिटी बढ़ाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि बड़ी इंफ्रा कंपनियां इसे एक भरोसेमंद सप्लायर के तौर पर देख रही हैं। आने वाले महीनों में कंपनी की परफॉर्मेंस पर नजर इस बात पर रहेगी कि वह इन ऑर्डर्स को समय पर और कुशलता से कैसे एक्जीक्यूट करती है।
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